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इस दिवाली - खुल कर सांस लो - कविता अशोक

Penulis : livenews on Friday, October 27, 2017 | 1:44 AM

Friday, October 27, 2017

                                       हरी ख़ुशहाल दिवाली - रहे प्रदुषण से दूर
                                                  पर्यावंविद -कविता अशोक 

अब आ गया है वह त्यौहार जिसका सबको साल भर रहता है इंतज़ार ! शुभ मंगल को लाने वाला ,  लक्मीज़ी के आगमन का नूर और दीयों मिठाईओं की चमक और खुशबू ! 
इस बार दिवाली कुछ नए अंदाज़ में माननी चाहिए -पटाखों  के प्रदुषण से बचने के लिए हमे समाज में सहयोग देना होगा !                                                             

स्वागत करते हैं हम सुप्रीम कोर्ट के इस फरमान का जिसने पटाखों की बिक्री पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी है ! इस वर्ष की  दिवाली अब पहले से भी सुन्दर  होगी ! 
हम प्रदुषण के प्रकोप से बच कर अपने घर आंगन को सजा कर ,इस पर्व का मज़ा लेंगे ! फिर वही राम -सीता के आगमन पर जैसे सहस्त्र दीप प्रज्वलित कर पूरी अयोध्या सजी थी ,दिल्ली भी ऐसी ही सजेगी। 
कौन कहता है  की जब बड़े बम -पटाखे नहीं फोड़े जायेंगे तो त्यौहार कैसा ?

पिछले कुछ पांच सालों में दिल्ली का प्रदुषण इस भयंकर रूप से बढ़  गया की सरकार भी समय आने पर कुछ ख़ास न कर सकी.जब सड़क पर सब धुंधला हो गया ,सभी मास्क लगा कर घूम रहे थे ,तो किसी वॉर ज़ोन  से कम नहीं लग रहा था। फिर हमारे जैसे समाज सेवक भी किसकी क्या मदद करते ? जब सांस ही नहीं आ रहा तो आदमी कहाँ जाएगा ? अशोक विहार से लेकर चाणक्यपुरी तक ,इसछोर से उस छोर तक सभी प्रदुषण का शिकार था ! 
स्कूलों में छुटियाँ की गयी ,कई दफ्तर भी बंद किये गए ! आप कह सकते हैं की यह केवल दिवाली के पटाखों का असर नहीं था ! सही है ,मगर पिछले साल दिवाली के तुरंत बाद जब पंजाब में फसल जलने का धुआं उठा तो उसने दो दूनी चार असर दिखाया और डूब गया हमारा शहर अंधकार में ! हाहाकार सा मचा हुआ था। हर नागरिक सरकार  ज़िम्मेदार ठहरा रहा था -यह सोच कर सबने अपने हाथ झाड़ लिए की दिल्ली सरकार  जाने ,हमें क्या ? 
यही सोच हमे ले डूबेगी ! 

स्कूली बच्चों के साथ कई आंदोलन ,NGO ट्री फॉर लाइफ चलाती है  -जंतर मंतर पर रैली हुई जिसमे प्रदुषण और पटाखे न जलाने  का वादा किया गया। छोटी कोशिश भी मायने रखती है। अगर हर नागरिक छोटा सा सहयोग दे तो हम सरकार का मुँह न देखते रहें ! स्वयं के बल पर ,अपनी कर्मशक्ति और बुद्धि  का प्रयोग करें और सुप्रीम कोर्ट के इस फरमान का पालन करें। यदि हमने ब्लैक में पटाखे खरीद कर जला लिए तो क्या फायदा ? हम उन निर्लज लोगों में होंगे जिन्हे न अपनी जान की फ़िक्र है न औरों की ! और तो और आप नयी पीढ़ी  को भी यह सन्देश देंगे की अपने लिए ही जीयो ,समाज से हमे क्या लेना !! स्वार्थ का यह एक नया रूप होगा। 
हम इस साल सूंदर पौधों का उपहार दे रहे हैं दोस्तों को ,परिवार में ! बाजार में अनेक तरह के डिज़ाइनर  पौधे और गमले  आये हुए हैं। प्रकर्ति का यह उपहार सराहनीये है और पर्यावरण के बचाव का अच्छा  सन्देश भी पहुंचाएगा ! 
सभी से यह प्रार्थना है की एयर पोल्लुशण के  दानव  से बचने में , इस साल सरकार का पूरा सहयोग दें। यह हम सब की भलाई के लिए है किसी का निजी प्रस्ताव नहीं ! 

मिलावट से बनी मिठाईओं से दूर रहे ,घर पर ही सूक्ष्म पूजन करें ,नए वस्त्र पहने और शहर में जो रौशनी की जाएगी उसका आनंद लें ! इस बार दिवाली में ,खुल कर सांस लें !!
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